मेरा दिल, जंगली फूल

Author: Jagdish vadher
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories

खिलना चाहा दिल का फुल पर
ग़मोके कांटो ने उसे बेजार किया 


संगदिल के दिल में उस ने जगह बनाना चाहा 
बेरूख नजरों की धूप ने उसे जार ज़ार किया 

कहीं तो वो देगी मुझे अपना हक
पर उसने तो दिल कुचल तार तार किया 

उम्मीद का दामन उस ने उलझा दिया 
हर उम्मीद को बेरुखी से नागवार किया 

आंखे भी अब तो थक गई, ना रो भी सकी,
उसकी राह ने मेरा दिल बड़ा बेकरार किया 

उन्हों ने फैसला इस तरह कर लिया 
नज़रे फेरकर हम से किनारा कर लिया 

हमने बड़ी शिद्दत से चाहा उन्हे,
उसने जंगली फूल समझ मुझे नकार दिया 

धड़कता रहा दिल उन्हीं के नामसे
और उन्हों ने इस मासूम दिल को ना प्यार दिया 

हमने अपना समझ थामना चाहा उन्हें 
उन्होंने जंगली फूल समझ धुत्कार दिया 

अब तो ये दिल की आग जला ही देगी मुझे 
मेरा दिल समझ जंगली फूल, उसने इसे मार दिया 

                      Mera dil , jangli phool

                                                  Jagdish vadher

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