एक औरत हीं अग्निपरीक्षा क्यों दे
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories
"
हर मोड़ पर सवालों की आग,
हर रिश्ते में शक की राख,
हर गलती पर सज़ा उसी को—
एक औरत ही क्यों अग्निपरीक्षा दे?
पिता के घर से विदा होते वक़्त,
संस्कारों का बोझ लाद दिया गया,
पति के घर में पहुँची तो
चरित्र का प्रमाण माँग लिया गया।
वो हँसे तो लज्जा की सीमा टूटे,
चुप रहे तो अभिमान का दोष लगे,
सपने देखे तो चरित्र ढीला,
और सह ले तो कमज़ोर कहलाए।
देवताओं की कथाओं से लेकर
आज की चौखट तक का सफ़र,
नाम बदले, युग बदले
पर सवाल वही— क्यों हर बार उसी पर शक?
क्या भरोसे की नींव
सिर्फ़ उसकी चुप्पी पर टिकी है?
क्या प्रेम की पहचान
सिर्फ़ उसकी सहनशीलता है?
जिस आग में उसे झोंका जाता है,
वो आग रिश्तों को भी जला देती है,
पर राख में भी वही खोजी जाती है—
एक औरत की पवित्रता।
अब सवाल वो नहीं, हमसे है—
कब तक हम उसे जलाकर
अपने समाज को निर्दोष साबित करेंगे?
क्यों अग्निपरीक्षा हमेशा
एक औरत ही दे?"
✍️Rekha gupta
#LafzBindu
Pratilipi
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