मैं कहीं भी नहीं
📌 Author: Rekha Gupta
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories
📧 Support: pratilipi
"मैं कहीं भी नहीं…
ना किसी किस्से की लकीरों में,
ना किसी याद की जागी तस्वीरों में।
मैं बस हवा की खोई सरगम-सा,
तेरे कंधे से छूकर गुजरती हूँ,
पर तू महसूस भी नहीं करता—
कि मैं अभी भी यहीं हूँ,
तुझमें कहीं गहरा उतरती हूँ।
मैं कहीं भी नहीं…
पर तेरी हर धड़कन में नाम मेरा,
तेरी नजरों की मोड़ों पर
एक अनकहा सा अंधेरा ठहरा है।
मैं पत्तों की खड़खड़ाहट में छिपी,
या रात की नींद के बीच पसरा,
जैसे कोई अधूरी चाहत
जिसे तू छोड़कर भी छोड़ न पाया।
मैं कहीं भी नहीं…
पर हर कहीं हूँ—
तेरे सन्नाटों में, तेरी धुनों में,
तेरे टूटकर फिर संभल जाने में।
मैं बस एक एहसास हूँ,
जो दिखता नहीं,
पर मिटता भी नहीं…
क्योंकि तू जानता है—
मैं कहीं भी नहीं,
फिर भी तेरे भीतर ही सबसे ज़्यादा हूँ।"
REKHA GUPTA
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