शब्द क्यों बच जाते हैं और लोग क्यों चले जाते हैं?
कुछ लोग चले जाते हैं। धीरे… बिना शोर के। लेकिन उनकी आवाज़ नहीं जाती। उनकी लिखी हुई पंक्तियाँ नहीं जाती। उनकी छोड़ी हुई भावनाएँ नहीं जाती।
यही शायद शब्दों की सबसे बड़ी ताकत है। इंसान समय से हार जाता है, लेकिन शब्द समय के साथ और गहरे होते जाते हैं।
किसी ने कभी सोचा है? जो कवि वर्षों पहले चला गया, उसकी लिखी हुई पंक्ति आज भी किसी अनजान व्यक्ति को रुला देती है। कैसे?
क्योंकि शब्द शरीर से नहीं, अनुभव से जन्म लेते हैं। और अनुभव मरते नहीं।
जब कोई लेखक लिखता है, तो वह केवल स्याही नहीं छोड़ता। वह अपना थोड़ा हिस्सा हर पंक्ति में रख देता है। इसलिए किताबें पुरानी हो सकती हैं, लेकिन उनमें छिपे लोग नहीं।
हम सब शायद इसी वजह से लिखते हैं। क्योंकि कहीं न कहीं हम चाहते हैं कि हमारे जाने के बाद भी कोई हमें पढ़ ले।
शायद इसी कारण शब्द बच जाते हैं… और लोग चले जाते हैं।
— LafzBindu
A place of untold emotions
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