Pahle hi bata du ki ye Aalochnatmak shreni me hai.......jiska arth hota hai sahi galat ko dikhana to aap comment me apni Ray share kar sakte hai....
माटी में गुंजे मंदिरों का पुकार पुराना है
गंगा का पानी में बहता यह संस्कार पुराना है
बुझे दीपक को अब घर-घर में जलाना है
भारत में राम राज्य लाना है
हम सब ने यहीं ठाना है.
भारत को हिन्दु राज्य बनाना है।
ना रखे कोई बैर आपस मे
जात-पात का भेद मिटाना है
हम सब ने यहीं हाना है,
भारत को हिन्दु राज्य बनाना है।
यह पंक्तियाँ सुनने में कितनी कर्णप्रिय लगती है। सुनकर ऐसा लगता है जैसे मानों शरीर में एक अलग हीं ऊर्जा का संचार हो रहा हो।
लेकिन जरा कल्पना कीजिए कि आपके पास एक सुन्दर वाटिका है, और इसमे केवल एक ही प्रकार के पुष्प लगे हुए है, तो उस बगीचे ही सुन्दरता का क्या ही आधार है।
हम सभी ईश्वर के संतान है। फिर चाहे वह मुसलमान हो या हिंदू, सिक्ख हो या ईसाई। ये सभी भारतमाता के गोद में मिल-जुल कर रहते है, तभी तो हमारा यह देश दुनियाँ सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है।
क्या ईश्वर अपने संतानों को आपस में लड़ते देख प्रसन्न हो रहा होगा? क्या भारतमाता अपने संतानों को देखकर खुश हो रही होगी कि हम सभी यह कहकर आपस में लड़ रहे है कि भारतमाता सिर्फ हमारी माता है।
और एक सवाल- क्या हमारा धर्म हमें हिसा सिखाता है ?
मैं वेदों का ज्ञाता तो नहीं हूँ, पर इतना जरूर जानता हूँ कि हमारा सनातन धर्म कभी हिंसा के मार्ग पर चलना नहीं सिखाता है।
फिर क्यों आज कुछ लोग धर्म का दलाल बनकर समाज में हिंसा फैलाने का कार्य कर रहे है? वे अपने आप को धर्म प्रचारक कहते है तो उसी धर्म का प्रचार करने के लिए लाखों रुपयों की मांग करते हैं। क्या ये सच में साधू - माहत्मा है? यदि ये माहात्मा होते तो समस्त संसार उनका परीवार होता। फिर हिंन्दु और मुस्लिम की बात हीं नहीं थी।
हिन्दु-मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौध पारसी सभी इस भारत रूपी बगीचे की सुन्दरता को गढ़ते है। और कुछ ऐसे लोग पैदा हो गए है जिन्हे यह सुंदरता तनिक भी प्यारी नहीं लग रहीं है। वे किसी भी कीमत पर इसे खराब करने को आतुर है।
ये लोग वहीं कथाकार है जो......
ये वैसे लोग हैं जिनके अंदर बंजरंगबली बसते है और लोगों के बारे में एक पर्चे कटवाते है।
ये वो लोग है जो बड़े जोर-शोर से भारत को हिंदु राज बनाने की बात बात करते है।
ये वो लोग है जो जात–पात मिटाने की बात करते है और यदि कोई छोटी जाति का आदमी इनके समक्ष आ जाए तो उसका छाया भी अपने आप पर नहीं पड़ने दें।
ये वो लोग है जो खुद मोह-माया के बंधन में रहकर माया मुक्त होने का ज्ञान देते हैं।
अरे ! असली साधु - माहात्मा तो वें है जिन्हे किसी चीज की चाह नहीं है। कुछ ऐसे महान लोग महाकुम्भ के मेले में अपना दर्शन दे देते है। ये भी हिन्दु धर्म के रक्षक है, लेकिन बाकियों की तरह हिंसा नहीं फैलाते ।
हिन्दु राज्य से क्या तात्पर्य है? क्या इसका अर्थ यह है कि भारत में केवल से हिन्दु हीं रहे। यदि ऐसा है तो जो पहले से जो अहिन्दू हैं उनका क्या होगा? क्या उन्हें मार दिया जाए या उनका धर्म परिवर्त कर दिया जाए ?हिन्दू धर्म यह इजाजत देता है? क्या यहीं नीति हैं?
एक समय के लिए यह मान लेते है कि भारत हिन्दू राज्य बन गया। तो क्या सारी लड़ाइयां बंद हो जाएगी ? क्या सच में जात-पात का भेद खत्म हो जाएगा? कोई है जो इस बात की गारंटी लेता हो।
अगर मैं लिखता रहा तो सवालों से पुरी किताब भर जाएगी।
लेकिन फिर भी यदि सवालों के जड़ तक, जाए तो यह सवाल आता है कि आखिर हमें बाँटा किसने और क्यों ?
हम इतिहास पढ़ते है पता चलता है कि प्राचीन समय में एक समूह के लोग एक ही प्रकार के कार्य करने में माहिर थे, और इसी को ध्यान में रखते हुए उस समुह को उसी कार्य के आधार पर छाँट दिया गया। इसके सकारात्मकता और नाकारात्मकता दोनों उभर कर आती है।
लेकिन यदि साकारात्मक भाव से देखा जाए तो यह बात भी सही है कि सभी कार्य सभी लोग नहीं कर सकते। एक डॉक्टर का कार्य इंजिनियर नहीं कर सकता है।
फिर भी ये आपस में मिल-जुलकर रहते है। ठिक इसी प्रकार हम भले हीं जाति में बंट आए है, लेकिन हमें मिल-जुलकर रहनी होगी।
और नाकारात्मकता है कि उस समूह के लोगों को उसी कार्य के लिए बाँध दिया जाता है जो कि सही नहीं है है। हमें इस नाकारात्मकता को दुर करना है। समाज के लोग अपनी पेशा का चयन स्वंय करे ।
हमें एक सभ्य समाज का गठन करना है। हमें भारतमाता स्वरूप इस वाटिका की सुंदरता बनाए रखनी चाहिए और ये तभी संभव है जब हम जात–पात,धर्म आदि से परे होकर समाज में मिलजुलकर रहे।
हमें बुझे दीपक को जलाना हैं,राम राज्य लाना है और राम राज्य हमे धर्म के नाम पर लड़ने की इजाजत नहीं देता।
अनेकता में एकता इस देश की शान है
तभी तो हमारा देश महान है।।

No comments:
Post a Comment