हार कर भी जीत गया



📌 Author: Pragati Gupta 
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories 
📧 Contact : Not available 



हार कर भी जो जीत गया
तेज सूर्य का था माथे पर,
पर भाग्य में लिखा अंधेरा था।
जिस माँ ने उसको जनम दिया,
उसी ने नदी में छोड़ा था।
'सूतपुत्र' के ताने सहकर,
वह वीर अकेला डटा रहा।
सामर्थ्य था अर्जुन से बढ़कर,
पर श्रापों से वह छला गया।
मित्रता की खातिर उसने,
परिणाम कभी न सोचा था।
कवच-कुण्डल दान में देकर,
मृत्यु को अपना मित्र बनाया था।
वह दानवीर, वह महायोद्धा,
इतिहास के पन्नों में सोता है।
पांडव सब पाकर भी रिक्त रहे,
पर कर्ण हार कर भी जीत गया।

कोई टिप्पणी नहीं

Blogger द्वारा संचालित.
LafzBindu Membership Writer Membership Writer