दिखावे का रिश्ता
Author: Rekha Gupta
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories
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हँसी ओढ़े, आँसू छुपाए,
हमने भी रिश्ता निभाया,
दुनिया के डर से हर दिन
सच को झूठ सा सजाया।
मिलते हैं, बातों में मिठास,
पर दिलों में सन्नाटा है,
नाम का साथ, रस्मों का बोझ,
बस यही अब नाता है।
तस्वीरों में मुस्कान वही,
जो दर्द पर परदा डाले,
भीड़ के बीच भी तनहा दिल
खामोशी में खुद को संभाले।
ना शिकवा है, ना कोई सवाल,
बस आदत बन गया है साथ,
दिखावे का रिश्ता ओढ़े हम
जी रहे हैं बिन जज़्बात।
काश कभी हिम्मत जुटे,
सच को सच सा कह पाएँ,
दिखावे की इस ज़िंदगी से
एक दिन आज़ाद हो जाएँ।
Dikhave ka rishta
Rekha gupta poem
Pratilipi
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