महबूब मेरे
Author: Rekha Gupta
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories
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एक मुलाक़ात ज़रूरी है,
तेरे जाने का कारण पूछने की,
क्यों अधूरी छोड़ दी मोहब्बत,
इस दिल को तन्हा छोड़ने की ।
हर रात सवाल बनकर जागी,
हर सुबह तेरी कमी ने टोका,
जो अपना कहता था कभी,
उसी ने सबसे पहले दिल तोड़ा ।
एक मुलाक़ात ज़रूरी है,
तेरी ख़ामोशी समझने को,
जो जवाब कभी मिले नहीं,
उन्हें आँखों में पढ़ने को।
ना शिकवा है अब, ना शिकायत,
बस एक टीस सी बाकी है,
तेरे बिन जो ज़िंदगी मिली,
वो ज़िंदगी से ज़्यादा सज़ा सी है।
एक मुलाक़ात ज़रूरी है,
फिर बिछड़ जाने के लिए ही सही,
कम से कम ये दिल तो जान ले—
कसूर किसका था… मेरा या तेरा ।
Rekha gupta poem
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