क्यों दे दूं दूसरा मौका


Author: Rekha Gupta 
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories 
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क्यों दे दूँ दूसरा मौका उसे,
जिसने भरोसे को तोड़ दिया,
मेरी खामोशी को कमज़ोरी समझ
मेरे सब्र का मज़ाक उड़ाया।

क्यों फिर थामूँ वही हाथ,
जिसने बीच राह छोड़ा था,
जब ज़रूरत थी साथ की,
तब उसने ही मुँह मोड़ा था।

हर बार माफी शब्दों में,
और कर्मों में वही छल,
वादे बदलते मौसम जैसे,
और सच हमेशा रहा जल।

दिल ने बहुत समझाया खुद को,
कि लोग बदल भी जाते हैं,
पर हर बदले चेहरे के पीछे,
वही ज़ख़्म फिर से मुस्कराते हैं।

अब खुद से किया है वादा,
ना टूटूँगी, ना बहकूँगी,
जो मेरा नहीं बन सका कभी,
उसे दोबारा क्यों अपनाऊँगी।

क्यों दे दूँ दूसरा मौका उसे,
जब पहली बार ही सब कह गया,
जो निभा न सका एक सच,
वो फिर क्या नया निभा पाएगा।"



Rekha gupta 

#lafzbindu: a place of untold emotions 

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