हर रिश्तों से छली गई पर,
Author: Rekha Gupta
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories
"
हर रिश्तों से छली गई पर,
ख़ुद से रिश्ता निभाती रही।
लोगों ने ज़ख़्म दिए हर मोड़ पर,
मैं मुस्कान ओढ़कर जाती रही।
अपनों ने ही पराया कर डाला,
गैरों से क्या गिला करती मैं।
हर बार टूटी, बिखरी, संभली,
फिर भी चुपचाप सहती रही मैं।
वादों की भीड़ में सच खो गया,
भरोसे की नींव हिलती रही।
हर रिश्तों से छली गई पर,
मेरी उम्मीद अब भी जलती रही।
आज अकेली हूँ तो क्या हुआ,
ख़ुद पर यक़ीन अभी बाक़ी है।
हर हार ने मुझे मज़बूत किया,
मेरी कहानी अभी बाक़ी है।"
Pratilipi
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