नैना बरसे
Author: Rekha gupta
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories
नैना बरसे, सावन बन जाएँ,
खामोशी भी आज गुनगुनाए।
बिन कहे जो दर्द था दिल में,
हर बूँद में वो ही बह जाए।
यादों की छत पर ठहरी रात,
चाँद भी आज कुछ रूठा-सा।
नैना बरसे, तो समझ आया,
इश्क़ भी कितना झूठा-सा।
हर आँसू में एक कहानी,
अनकही सी, अधूरी-सी।
नैना बरसे, तो भीगी पलकें,
लगती हैं अब पूरी-सी।
बरसते नैना, थक कर बोले—
अब और नहीं कोई गिला।
दर्द धुला इन बूँदों में,
मन ने खुद को फिर से सिला।
Naina barshe
Pratilipi
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