नीलकमल: दो जन्मों की प्रेम कहानी


Author: Rekha Gupta
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories
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कई दशक पहले एक प्राचीन रियासत था।  राजा महाराजाओ का समय था। उस रियासत के महाराज वीर सिंह प्रताप थे। उनका भव्य महल और 
महल के पीछे वाले वाले हिस्से के किनारे फैली विशाल झील। 

चांदनी रात थी ।झील के बीचों-बीच
नीली रोशनी में नहाया हुआ
एक नील कमल जो पूरा खिला नहीं था शायद किसी के इंतजार में था । 

उस रात महल के पीछे से सैनिकों से बचकर दो लोग चुपचाप चले जा रहे थे बिना किसी की नजरों में आए। कुछ देर बाद वो दोनों झील किनारे पहुंचे। दोनों ने अपने ऊपर लपेटे कपड़े को हटा दिया। वो दोनों कोई और नहीं एक थी वीर सिंह प्रताप की बेटी राजकुमारी राधा दूसरी उसकी सहेली कुसुम।

चांद की रोशनी में राजकुमारी राधा की खूबसूरती और दमक रही थी। सबसे खास थी उसकी आंखे जो गहरी नीली थी। एक बार कोई देख ले उन आंखों मे तो अपना वजूद ही खो दे।
राधा को नीले रंग के कमल देखने की उत्सुकता थी इसलिए वो अपनी सहेली के साथ छुपकर इसे देखने चली आई। अभी कमल खिला नहीं था ।

मीरा(राधा) झील के किनारे खड़ी थी।
नील कमल की नीली आभा उसके चेहरे पर पड़ रही थी। उसकी आँखों में एक अनकहा डर था उसके पिता को पता न चले कि वो यहां आई है अकेले।

तभी राधा को ऐसा लगा कोई उसे देख रहा है। उसने पलट कर देखा  दूर, पीपल के पेड़ के साए में में एक युवक का वजूद नजर आया। वो कोई और नहीं अंश था। उनकी निगाहें मिलीं बस एक पल के लिए। 
उसी एक पल में वो नील कमल का फूल खिल गया। जो अब तक शायद इन दोनों का ही इंतजार कर रहा था ।


न शब्द थे, न वादा, न कोई इकरार,
निगाहों ने लिख दी जन्मों का प्यार।

बस एक पल के लिए—पर उस पल में
कई साल समा गए।

हवा चली।
नील कमल की पंखुड़ियाँ हिलीं।
राधा ने अपनी नजरें फेर ली। लेकिन अंश वो अपना दिल हार गया । नीली आंखों वाली ने उसका दिल चुरा लिया।

राधा और अंश की ये मुलाकात आगे चलकर क्या रंग लाएगी। ये तो वक्त ही जाने।  नील कमल ही साक्षी है इस मुलाकात की।

इसका अगला पाठ जल्द ही लाया जाएगा तब तक जुड़े रहे lafzBindu के साथ

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