नीलकमल: दो जन्मों की प्रेम कहानी

Author: Rekha Gupta
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories
🙏 Support: Retting button niche hai

Audio version


                       Nilkamal —part(2)
 अंश अपलक राधा को पीछे से देखता रहा। अंश तो अपना दिल हार बैठा नीली आंखों वाली पर।

कुसुम ने राधा से कहा, "राजकुमारी जी चलिए अब तो आपने नील कमल को देख लिया। अब हमे महल जल्दी लौटना होगा। नहीं तो महाराज के क्रोध का सामना करना पड़ेगा।" राधा ने धीरे से अपनी पलके झपकाई।

राधा को ये महसूस हो रहा था। जिससे अभी नज़रे मिली वो अपलक उसे देख रहा है। राधा की हिम्मत नहीं हुई पीछे मुड़कर देखने की। और वो कुसुम के साथ महल के रास्ते चल दी।

अंश राधा को रोकना चाहता था। और उसके पीछे चल दिया। अंश के दोस्त केशव ने आकर उसे रोक दिया।, "कहा जा रहा है । वो राजकुमारी है कोई देख लेगा तो हम दोनों मुसीबत में पड़ जाएंगे।" मन मारकर अंश को केशव के साथ लौटना पड़ा।

राधा और कुसुम महल लौट आए छुपते छुपाते। राधा अपने में आकर बिस्तर पर लेट गई। राधा ने सोने की कोशिश की। आंखे बंद करते ही अंश अपलक निहारता नजर आया ।

वही हाल वहां अंश का भी था। बस उसे वही नज़ारा दिख रहा था जब दोनों के नैन मिले थे।

जब निगाहें मिलीं,
दिल ने ये क्या कर दिया…
एक पल में उम्र भर का,
सफ़र शुरू कर दिया।

नील कमल भी ठहर गया,
झील ने साँसें रोक लीं,
तेरी एक झुकी नज़र ने,
मेरी दुनिया बदल दी।

चाहत के इस सफर में,
इस तरह रूहें जुड़ गईं,
अनकहे से इस एहसास में,
जन्मों की राह मिल गई।

अगली सुबह राधा उठी एक नए अहसास के साथ। जो बिना बात मुस्कराए जा रही थी। बस उसकी सखी ही जानती थी। उसके चेहरे पर ये नूर क्यों है।

ऐसे ही दो दिन गुजर गए। अंश रोज इस उम्मीद में झील किनारे जाता शायद राधा की एक झलक मिल जाए। पर वो नहीं थी। अंश का मन बेचैन हुआ जा रहा था। कैसे भी करके वो राधा से मिलना चाहता था।

केशव सब समझ रहा। उसने अंश को समझाने की बहुत कोशिश की प्यार में पड़ा अंश कहा उसकी बात सुनता। वो कहता "अगर यह प्रेम गलत है,तो दिल इतनी शांति क्यों महसूस कर रहा है । दिल में उससे मिलने की तमन्ना क्यों है। फिर से उसकी गहरी नीली आंखों में अपना वजूद देखना चाहता हूं।"

झील किनारे खड़ा अंश अपने दोस्त केशव से ये बातें बोल रहा था। फिर अंश ने नील कमल को झील से तोड़ने की कोशिश की—
पर जैसे ही उसका हाथ आगे बढ़ा,
पानी में अजीब-सी लहर उठी।
वो रुक गया ये सोचकर
इसमें कोई और शक्ति भी शामिल है। ये हमारी पहली मुलाकात का साक्षी है ।

अपने दोस्त की हालत केशव से देखी नहीं जा रही थी। इसलिए उसने कहा ,"मैं कोशिश करूंगा की तू राजकुमारी राधा को कैसे देख सकेगा। बस एक बार तेरे लिए ये काम करूंगा। अंश खुशी से केशव के गले लग गया।

देखते हैं अब केशव क्या करता है ।अंश को राजकुमारी राधा की एक झलक देखने को मिल जाए।

कोशिश करूंगी अगला भाग जल्दी ही दूं। तब तक आप सभी पाठको से निवेदन है कि इस स्टोरी पर अपना साथ बनाए रखें। पढ़कर अपनी कीमती समीक्षा  देकर मुझे प्रोत्साहित करें 🙏 🙏 🙏 🙏 🙏 🙏




कोई टिप्पणी नहीं

Blogger द्वारा संचालित.
LafzBindu Membership Writer Membership Writer