नीलकमल— ( part —3)
Author: Rekha Gupta
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories
🙏 Support: Retting button niche hai
Audio version
"अंश से वादा करने के बाद केशव सोचने लगा । अंश और राजकुमारी राधा की मुलाकात कैसे करवाई जाए।
अगले दिन
आज राजकुमारी राधा का जन्मदिन था।
महल में सुबह से ही चहल-पहल थी। रसोइयों में पकवान बन रहे थे, आँगन में रंगोली सजाई जा रही थी और पूरे महल को फूलों से सजाया गया था।
पर जिस लड़की के लिए यह सब हो रहा था।—उसके चेहरे पर खुशी कम और घबराहट ज़्यादा थी।
अंश से मिलने के बाद बहुत कुछ बदल गया था उसकी जिंदगी में। बिना बात जो मुस्कान उसके चेहरे पर थी। कोई परेशानी न हो उसे किसी ने वजह पूछा तो क्या जवाब देगी
राधा अपने कक्ष की खिड़की के पास बैठी तैयार हो रही थी। कुसुम भी उसके साथ थी। दासी उसके बालों में गजरा लगा रही थी। हल्की गुलाबी साड़ी, माथे पर छोटी-सी बिंदी और हाथों में कंगन ।
—वो आज पहले से भी अधिक सुंदर लग रही थी।

फिर भी उसका मन बार-बार झील के उस पार भटक जाता।
जहाँ उसने अंश की एक झलक देखी थी। उसे नहीं पता था। आज उसका दीवाना फिर उससे मिलने के लिए क्या करने वाला था।
आज उसे मंदिर जाना था।
रियासत की परंपरा थी कि राजघराने की बेटी अपने जन्मदिन पर गाँव के प्राचीन शिव मंदिर में पूजा अर्चना करे और गरीबों को दान दे।
महाराज वीर सिंह प्रताप का आदेश था। सैनिकों की कड़ी निगरानी में राजकुमारी राधा मंदिर अपनी सखी कुसुम और दासियों के साथ रहेगी।
महल के मुख्य द्वार पर रथ तैयार खड़ा था। सफेद घोड़ों वाला सुनहरा रथ, पर उसके चारों ओर हथियारबंद सैनिकों का घेरा किसी कैद की तरह लग रहा था।
सेनापति ने कड़े स्वर में कहा—
“पूरे रास्ते राजकुमारी के आसपास कोई न आए। यह राजा साहब का सख्त आदेश है।”
राधा अपनी सखी और दासियों के साथ रथ की ओर बढ़ी उसके पीछे कुछ सैनिक साथ चल रहे थे । तलवारें चमक रही थीं, आँखें चौकन्नी थीं। गाँव वाले सिर झुकाकर खड़े हो गए, पर राधा को किसी बंदिश से कम नहीं लगता था।
रथ चला।
मंदिर का रास्ता झील के किनारे से होकर जाता था। पानी की लहरें मानो उसे कुछ याद दिला रही थीं। राधा ने परदा थोड़ा-सा सरकाया और बाहर का नजारा देखने लगी।
उधर केशव ने अंश को आकर बताया। आज राजकुमारी राधा मंदिर आ रही है। क्योंकि आज राधा का जन्मदिन है। वो शिव मंदिर में दर्शन और गरीबों को दान धर्म भी करेगी।
अब समस्या ये थी अंश राधा को कैसे मिल सकेगा। सैनिकों की कड़ी निगरानी रहेगी। मिलना असंभव है।
अंश ने कहा “आज अगर मैं राधा से नहीं मिला तो शायद ही कभी मौका मिले,” उसने अपने मित्र केशव से कहा,
केशव घबराकर बोला—
“पागल मत बन अंश ! सैनिकों के बीच जाना मतलब मौत को बुलाना है।”
अंश तो दीवाना हो गया था उसकी आँखों में जुनून था “मौत से डर लगता तो प्यार ही क्यों करता?”
उसके मन में बहुत कुछ चल रहा था। वो केशव को लेकर मंदिर की ओर चल पड़ा।
शिव मंदिर के बाहर भी सैनिक तैनात थे। जैसे ही राधा वहाँ पहुँची, सेनापति ने चारों ओर मोर्चा संभाल लिया।
राधा अपनी सखी और दासियों के साथ मंदिर की सीढ़ियाँ चढ़ रही थी। एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी उसे।
उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
भगवान शिव के सामने जैसे ही राधा ने आंखे बंद की अंश की झलक दिखी। राधा को समझ नहीं आ रहा था। क्या हो रहा है। भगवान शिव जी से मन ही मन सवाल कर रही थी। उसकी इस दुविधा का निवारण करें ।
राज पुरोहित ने राधा से पूजा पाठ करवाई। भगवान का आशीर्वाद लेकर। गरीबों को दान धर्म करने के लिए आगे बढ़ गई। जैसे जैसे वो गरीबों को दान देते हुए आगे बढ़ रही थी। उसका दिल बेचैन हुए जा रहा था। दान देते वक्त एक हाथ उसके सामने ऐसा दिखा।

जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी। वो हाथ कोई और नहीं अंश का था। जो इतना दीवाना था कि गरीबों के बीच उस कतार में बैठा था सिर्फ राधा की एक झलक पाने के लिए।
आज तो उसने नीली आंखों वाली को फिर से देखा। राधा ने अपने चेहरे के भाव छिपा लिए और दान देकर आगे बढ़ गई। और अंश उसे अपलक देखता रहा।।
केशव ने धीरे से उसके कान में कहा,""ऐसे मत देख नहीं तो आज ही तुझे राजकुमारी को इस तरह देखने के जुर्म में मृत्युदंड मिल जाएगा।
देखते हैं अंश की ये दीवानगी कहा तक जाएगी।
मोहब्बत तो वो है जिसे हो जाए फिर तो वो किसी की नहीं सुनता।
Pratilipi
Post a Comment