बारिश भी रो पड़ी | दर्दभरी अल्फ़ाज़

Author: Alka Tiwari ( membership writer )
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories 
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गाने के रूप में


बारिश भी आज मेरे साथ रो पड़ी,
जब तेरी कमी हर बूँद में घुल पड़ी।

हँसते चेहरे के पीछे छुपा जो दर्द था,
रात आई तो वो चुपचाप खुल पड़ी।

तू पास होकर भी मेरा न हो सका,
यही बात दिल को सबसे ज़्यादा चुभ पड़ी।

चाँद ने भी आज मुझसे मुँह मोड़ लिया,
शायद मेरी तन्हाई उसे भी बुरी लगी।

हर वादा वक़्त के हाथों टूट गया,
और उम्मीद आख़िरी साँस तक लड़ पड़ी।

मैंने कुछ कहा नहीं, बस देखती रही,
जब मेरी जगह किसी और ने ले पड़ी।

ख़ुद को मजबूत दिखाने की आदत थी,
आज वो आदत भी आँखों से बह पड़ी।

अब किसी से शिकायत भी क्या करूँ,
मेरी क़िस्मत ही मुझसे रूठ पड़ी।

बारिश थमी पर दिल अब भी भीगता है,
कुछ यादें हैं जो सूखने से इंकार कर पड़ीं।"

Alka tiwari.......

मेरी ये कविता आपको बहुत पसंद आएगी—तेरे इश्क़ में लुटा बैठे है

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