नीलकमल | Nilkamal (part 4) |

Author: Rekha Gupta
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories
🙏 Support: Retting button niche hai
Note: सारे पार्ट का लिंक नीचे दिया गया है कहानी के अंत में

Audio version


"मंदिर से लौटने पर राधा बहुत बेचैन रही। फिर से अंश से मिलना संजोग ही था किसी ने सोचा ही नहीं था राधा से मिलने के लिए अंश गरीबों के साथ बैठेगा। ये इश्क कमबख्त कुछ भी करवा ले।

दोपहर ढल रही थी।
महल के पीछे  बहुत बड़ा उपवन था। वो जगह उस समय सबसे शांत होता था। हल्की धूप पेड़ों की पत्तियों से छनकर ज़मीन पर गिर रही थी। हवा में फूलों की ख़ुशबू घुली हुई थी, लेकिन राधा का मन उस ख़ुशबू में नहीं, किसी और ही एहसास में उलझा हुआ था।

वो पत्थर की बेंच पर बैठी थी।
गोद में एक मोटी-सी ड्रॉइंग बुक, हाथ में कोयले की पेंसिल।
आँखें बार-बार काग़ज़ पर जातीं… फिर ठहर जातीं।
काग़ज़ पर उभरता चेहरा
कोई और नहीं—
अंश था।

राधा के ख्यालों में अंश था । उसकी उंगलियां धीरे धीरे चल रही थी । कुछ देर बाद राधा की सखी कुसुम आई। उसने जब राधा को चित्र बनाते देखा तो वो भी देखने लगी। चित्र देखते ही कुसुम हैरान रह गई। उसने राधा को आवाज लगाई ,""ये क्या बना दिया आपने राजकुमारी जी।"" तब जाकर राधा अपने होश में आई और बनी हुई तस्वीर देखने लगी।


उसने अंश की आँखें बनाईं— फिर उसके होंठ, जिन पर अक्सर निश्छल मुस्कान रहती थी।

राधा के होंठों पर भी अनायास मुस्कान आ गई।
“तुम्हें पता है,” उसने मन ही मन कहा,
“तुम्हें देखे बिना भी
मैं तुम्हें कितनी साफ़ देख सकती हूँ…”

तुम सामने नहीं हो,
फिर भी हर तरफ़ तुम ही तुम हो…
ये दिल किसे समझाए,
कि ख़ामोशी में भी
तुमसे ही बात होती है।

उसकी पलकों पर हल्की नमी उतर आई। कुछ पल बस काग़ज़ को देखती रही,
मानो पूछ रही हो—
क्या सच में यही चेहरा
मेरी किस्मत बन गया है?

कुसुम ने कहा ,"" राजकुमारी जी अगर किसी की नजर पड़ी तो गजब हो जाएगा।"" राधा क्या करें उस चित्र को फाड़ नहीं सकती थी। उसी पल ऐसा लगा कोई आ रहा है दोनों चौंक गई।
राधा ने तुरंत जिस कागज पर अंश की तस्वीर बनी थी उसे छुपा दिया और खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश करने लगी। कुछ देर बाद कुसुम के साथ अपने  कमरे  की ओर चली गई। उसने अंश की तस्वीर को एक झलक देखने के बाद ऐसी जगह छुपा दिया। किसी की नजर ना पड़े। 

कुसुम के मन में सवाल था । वो राधा से पूछकर उसे परेशान नहीं होने देना चाहती थी। कुसुम राधा को बहुत अच्छे से जानती थी। इसलिए राधा के चेहरे के भाव देखकर ही समझ जाती की वो कब खुश होती कब दुखी।
राधा के हर सुख दुख के साथी थी कुसुम।

कुसुम ने राधा से कहा , "" राजकुमारी जी कुछ चीजें वक्त पर छोड़ दीजिए, पता नहीं नियति ने क्या लिखा है।""राधा ने सहमति में अपना सिर हिलाया।

यहां हमारे दीवाने साहब झील किनारे बैठे हुए हैं। खो गए हैं पूरी तरह अपनी नीली आंखों वाली में । जनाब राधा की दान दिए हुए वस्त्र को एकटक निहार रहे हैं।


नैनों वाली ने हाय मेरा दिल लूटा,
बिन बोले ही मुड़कर चली गई ।
एक नज़र क्या मिली, क़िस्मत बदल गई,
सादगी में उसकी, ये दिल पूरी तरह डूबा।

मिलते हैं अगले भाग में , 
अंश आगे क्या करता है । अब तो दीवानगी सर चढ़ गई है।

कृपया कमेंट में बताएं कि कहानी कैसी लग रही है

कोई टिप्पणी नहीं

Blogger द्वारा संचालित.
LafzBindu Membership Writer Membership Writer