छुकर मेरे मन को— Romantic kavita
Author: Rekha Gupta ( membership writer )
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories
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इस कविता को गीत के रूप में सुनें...
"छूकर मेरे मन को, तुम यूँ चले आए,
बिन बोले ही कितनी बातें कह गए।
खामोश लम्हों में जो सुकून था छुपा,
वो तुम्हारी एक मुस्कान में मिल गया ।
नज़रें मिलीं तो वक्त ठहर-सा गया,
साँसों ने भी जैसे गीत गुनगुनाया।
दिल ने कहा—बस इतना ही काफ़ी है,
तुम्हारा होना, मेरा होना बन पाया।
छूकर मेरे मन को, यूँ ठहर जाना,
भीड़ में भी मुझे मेरा बना जाना।
रेखा गुप्ता
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Pratilipi
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