अपनो से दिल लगाने की आदत ना रही
Author: Alka Tiwari ( membership writer )
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories
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इस कविता को गीत के रूप में सुनें...
"अपनों से दिल लगाने की आदत न रही,
हर वक्त मुस्कुराने की आदत न रही।
जो आँखों में चमक थी, अब धुंधली हो गई,
हर ख्वाब की राह में तन्हाई ही मिली।
हर खुशी जो बांटी थी, अब गुमसुम सी लगी,
दिल में कहीं एक खालीपन की आवाज़ गूँजती रही।
सपनों की महफ़िल में अब सिर्फ यादें बची हैं,
हर हँसी की जगह अब सिर्फ आँसू बहते हैं।
अब ख्वाबों की गलियों में भी सन्नाटा बस गया,
हर खुशी का मौसम अब किसी और का हो गया।
जो साथ थे कभी, आज उनसे दूरी हो गई,
हर दिल की धड़कन अब अधूरी कहानी हो गई।
छोड़ गए हमें उन राहों में अकेले,
हर मुस्कान अब सिर्फ एक याद बनके रह गई।
तेरे जाने से अब सब रंग फीके लगते हैं,
हर मौसम में सिर्फ तेरी कमी लगती है।
दिल में जले जो अरमान थे, सब राख हो गए,
हर ख्वाब की छाँव में अब केवल दर्द सा रह गया।
अपनों ने भी अब हमें खुद से जुदा कर दिया,
हर आवाज़ में अब सिर्फ खालीपन ही रह गया
रास्तों में हर कदम पर तेरी यादें आती हैं,
हर धड़कन में बस तन्हाई ही साथ निभाती है।
अपनों से दिल लगाने की आदत नहीं रही,
हर वक्त मुस्कुराने की आदत नहीं रही।"
Apni se Dil lagane ki aadat na rahi
Alka tiwari.......
मेरी ये कविता आपको बहुत पसंद आएगी—अधूरी मोहब्बत
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Pratilipi
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