तेरी बाहों में दम निकले

Author: Rekha Gupta ( membership writer )
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories 
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इस कविता को गीत के रूप में सुनें...



"तेरी बाहों में दम निकले,
ये दुआ हर सांस में बस गई है,
तेरे सीने की धड़कन सुनूँ,
यही मेरी आख़िरी ख़्वाहिश बन गई है।

तेरे होंठों की हल्की-सी गर्मी,
मेरे माथे पर ठहर जाए,
वक़्त वहीं रुक जाए ,
जहाँ तेरी बाँहों की हद शुरू हो जाए।

तेरी उँगलियों की वो गिरफ्त,
जो मुझे दुनिया से चुरा ले,
तेरी बाहों की वो आगोश,
मेरी हर कमी को पूरा कर डाले।

न जन्नत की चाह,
न किसी और पल का सपना,
तेरी बाहों में सिमटकर मर जाना भी,
मेरे लिए इश्क़ का सबसे हसीन सच है।"


रेखा गुप्ता

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