इंतज़ार

Author: Rekha Gupta 
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories


इंतज़ार कोई घड़ी नहीं
जो वक्त देखते ही खत्म हो जाए,
ये तो वो सन्नाटा है
जो हर पल दिल में गूंज जाए।
दरवाज़े पर टिकती निगाहें,
रास्तों से बातें करती आँखें,
हर आहट पर टूटती उम्मीद,
फिर भी मुस्कुराती सी आँखें।
दिन ढलते हैं, रातें जागती हैं,
सपनों में भी वही नाम आता है,
मिलने की चाह में बीत जाता है सब,
पर इंतज़ार वहीं ठहर जाता है।
कभी लगता है आओगे आज,
कभी खुद से ही रूठ जाते हैं,
इंतज़ार सिखा देता है जीना,
और हम चुपचाप सीख जाते हैं।
इंतज़ार बस इंतज़ार नहीं,
ये भरोसे की आख़िरी डोर है,
जो टूटे तो सब बिखर जाए,
और बचे तो ज़िंदगी की ओर है।


                        INTEZAAR 

                                                       REKHA GUPTA 


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