उम्मीद

Author: Rekha Gupta 
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories


टूटी हुई साँसों के बीच,
जब ख़ामोशी भी बोझ लगे,
अँधेरी रात की गोद में
एक दीया फिर भी रोज़ जले।
हारी हुई आँखों में
जब सपने सोने लगते हैं,
उम्मीद ही है जो चुपचाप
दिल को फिर से जगाती है।
हर गिरते हुए क़दम से कहती—
रुकना मना है अभी,
हर बिखरे हुए ख़्वाब से कहती—
कहानी पूरी लिखनी है अभी।
काँटों भरी राहों में
फूलों का वादा करती है,
उम्मीद, टूटकर भी
फिर से मुस्कुराना सिखाती है।
क्योंकि जब सब कुछ ख़ामोश हो जाए,
और कोई साथ न दे,
तब भी उम्मीद कहती है—
मैं हूँ… बस चलती रहो।
                            
                         Ummid 

                                               Rekha gupta 


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