मेरी खामोशी

Author: Rekha Gupta 
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories



मेरी खामोशी को कमजोरी न समझ,
ये वो सागर है जो शोर नहीं करता।
लहरों की तरह टूटना जनता है,
पर हर किनारे पर खुद को नहीं बिखेरता।
मेरी खामोशी में हज़ारों सवाल हैं,
कुछ अधूरे ख़्वाब, कुछ टूटे अरमान हैं।
जो कह न सकी ज़ुबान से आज तक,
वो सब मेरी चुप्पी के बयान हैं।
मैं चुप हूँ तो क्या, महसूस सब करती हूँ,
हर नज़र, हर ताना, हर जख़्म गिनती हूँ।
बस फर्क इतना है दुनिया से,
मैं दर्द को शोर नहीं बनने देती हूँ।
मेरी खामोशी में सब्र की ताक़त है,
ये हार नहीं, खुद से मुलाक़ात है।
आज चुप हूँ, मगर याद रखना,
कल मेरी खामोशी ही मेरी आवाज़ है।

                                                 रेखा गुप्ता         

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