रोज़ अपनी तकदीर से लड़ती हूं


Author: Rekha Gupta 
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories

रोज़ अपनी तक़दीर से लड़ती हूँ,
ख़ामोशी को हथियार बनाती हूँ।
हर ठोकर से कुछ सीखकर,
खुद को और मज़बूत बनाती हूँ।
हालात जब सवाल बन जाएँ,
मैं जवाब बनना सीख लेती हूँ।
आँसू जब आँखों में ठहरें,
मैं मुस्कान ओढ़ लेती हूँ।
कहते हैं किस्मत लिखी जाती है,
पर मैं उसे लिखना जानती हूँ।
कल क्या होगा ये मत पूछो,
आज को जीतना पहचानती हूँ।
रोज़ अपनी तक़दीर से लड़ती हूँ,
हार से दोस्ती नहीं करती।
मैं स्त्री हूँ—टूट सकती हूँ,
पर झुकना मेरी फ़ितरत नहीं। ✨

          ROJ APNE TAQDEER SE LADTI HU

                                                      REKHA GUPTA


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