आज की नारी
Author: Rekha Gupta(membership writer)
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories
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🎵 इस कविता को गाने के रूप में सुनें
दृढ़ निश्चय कर जो मै निकली,
वो मंजिल मुझसे दूर नहीं।
मैं स्त्री हूं तो क्या हुआ,
मैं इतनी कमजोर नहीं।।
मैं साथी हूं तेरे जीवन की,
पैरों में बंधने वाली जंजीर नहीं।
मैं तुलसी हूं तेरे आंगन की,
समझो रेगिस्तानी फूल नहीं।।
हर पग पर मैं झुकती आई,
फिर भी मेरा कोई मान नहीं।
अगर त्याग रूप है नारी जीवन,
तो मुझको यह मंजूर नहीं।।
मैं ही लक्ष्मी मैं ही दुर्गा,
मुझसे ही है काली, चंडी।
मैं ही स्वाधा मैं ही स्वाहा,
मुझ बिन ये संसार नहीं!!
रेखा गुप्ता
Pratilipi
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