जो मिला नहीं—Heartbreak poem

Author: Alka Tiwari (membership writer)
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories 
🙏 Support — Retting button niche hai
🎵 इस कविता को गाने के रूप में सुनें


शिकवा नहीं किसी से, किसी से गिला नहीं
जो रब ने न दिया, वो मुझको मिला नहीं।

मैंने तक़दीर से लड़ना कभी सीखा ही नहीं,
जो छूट गया हाथों से, उसे पुकारा ही नहीं।
ख़ामोशी ओढ़ ली मैंने सिसकियों की जगह,
क्योंकि हर दर्द को दुनिया ने समझा नहीं।

रूह तक उतर गया जो, वो दर्द बयान कैसे हो,
जो आँखों में ठहर जाए, वो आँसू बहें कैसे हो।
मैंने खुद को ही पढ़ा है तन्हाई की किताबों में,
हर ज़ख़्म लफ़्ज़ बना, मगर शोर किया नहीं।


कुछ रिश्ते इबादत थे, मुकम्मल हो न सके,
कुछ ख़्वाब सजदे में थे, क़ुबूल हो न सके।
मैंने हर अधूरी चाहत को ख़ुदा मान लिया,
क्योंकि टूटकर भी मैंने कोई गुनाह किया नहीं।

अब सुकून शिकायत छोड़ देने में है,
हर न मिलने वाली चीज़ को छोड़ देने में है।
जो लिखा ही नहीं था मेरी रेखाओं में,
उसके लिए मैंने अब दिल को रोका नहीं।

शिकवा नहीं किसी से, किसी से गिला नहीं
जो रब ने न दिया वो मुझको मिला नहीं।


                Jo mila nahi

Alka tiwari poem
LafzBindu 

कोई टिप्पणी नहीं

Blogger द्वारा संचालित.
LafzBindu Membership Writer Membership Writer