तुमसे मन की लगन
Author: Rekha Gupta(membership writer)
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories
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🎵 इस कविता को गाने के रूप में सुनें
"तुमसे मन की लगन ऐसी लगी,
जैसे सूनी धरा को सावन मिली।
न कुछ कहा, न कुछ सुना,
फिर भी रूह ने रूह को पहचान लिया ।
तुम्हारी खामोशी में भी सदा है,
मेरी हर दुआ का इक पता है।
तुम पास न हो, फिर भी यकीन,
हर सांस में तुम्हारा ही नशा है।
न नाम चाहिए, न रिश्ता कोई,
बस मन का तुमसे जुड़ना काफी है।
ये प्रेम नहीं, ये साधना है शायद,
जहाँ तुम हो—वहीं मेरी इबादत है।"
Rekha Gupta
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Pratilipi
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