ज़िंदगी कुछ पल का ठिकाना है


Author: Alka Tiwari ( membership writer )
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories 
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गाने के रूप में


"ज़िंदगी कुछ पल का ठिकाना है,
यह सच हर ठोकर पर समझ आता है।
जब अपना ही हाथ छूट जाता है,
और भरोसा भी साथ छोड़ जाता है।

हम हँसते रहे दुनिया के सामने,
दिल भीतर ही भीतर रोता रहा।
हर अपना कहने वाला शख़्स,
वक़्त आने पर चुप होता रहा।

जो मुस्कान थी, वो भी अब भारी लगती है,
हर अपनी बात कहीं खो जाती है।
राहें बदलती हैं, लोग बदल जाते हैं,
और यादें बस खामोशी बन जाती हैं।

हमने चाहा था उम्र भर का साथ,
मगर साथ भी सौदा बन जाता है।
जो कल तक सब कुछ लगता था,
वही आज बस एक नाम रह जाता है।


सब कुछ होते हुए भी अकेलापन,
सीने में धीरे‑धीरे भर जाता है।
और अंत में बस यही बचता है
जो जितना अपना था,
वह उतना ही
ज़्यादा दर्द देकर जाता है।


ज़िंदगी कुछ पल का ठिकाना है,
और दर्द यही बताता है
जो खो गया, वही सबसे अपना था,
और जो बचा, वही सबसे तन्हा है।"

Alka tiwari.......

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