नज़रे बोली दिल की जुबा

Author: Rekha Gupta 
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories 


                       नज़रे बोली दिल की जुबा

विधान और संजना की पहली मुलाकात कॉलेज की लाइब्रेरी में हुई थी। दोनों एक ही किताब लेने पहुँचे, और जब उनकी उंगलियाँ किताब पर एक साथ टकराईं तो नज़रें मिलीं। पहली ही बार में कोई इज़हार नहीं हुआ, लेकिन एक अनकहा एहसास दोनों के दिल में उतर गया।

विधान पढ़ाई में बहुत तेज़ था, वहीं संजना म्यूज़िक की शौकीन। अक्सर लाइब्रेरी में मिलना, फिर कॉरिडोर में एक-दूसरे को देखना उनकी दिनचर्या बन गई। धीरे-धीरे उन्होंने एक-दूसरे से बातें शुरू कीं। विधान को संजना की मुस्कान बेहद भाती थी और संजना को विधान की सादगी।

समय के साथ उनकी दोस्ती गहरी होती गई। साथ में कैंटीन में चाय, म्यूज़िक क्लब की प्रैक्टिस, लाइब्रेरी में पढ़ाई – ये सब उनके रिश्ते को मजबूत बना रहे थे। पर दोनों में से किसी ने भी आई लव यू नहीं कहा। उन्हें डर था कि कहीं दोस्ती टूट न जाए।

एक दिन कॉलेज का म्यूज़िक फेस्ट हुआ। संजना ने स्टेज पर गाना गाया और गाने की आखिरी लाइन में अचानक उसकी नज़र विधान पर टिक गई। गीत खत्म होते ही पूरे हॉल में तालियाँ गूँज उठीं, लेकिन विधान के दिल में कुछ और ही बज रहा था। उसे यकीन हो गया कि भी वही महसूस करती है जो वह।

फेस्ट के बाद विधान ने संजना को कैंपस के गार्डन में बुलाया। दोनों चुपचाप बैठे रहे। फिर विधान ने हल्की मुस्कान के साथ कहा –
संजना, क्या तुमने कभी सोचा है कि हमारी कहानी सिर्फ दोस्ती तक ही क्यों रहे?
संजना की आँखों में आँसू थे, उसने धीमे से जवाब दिया – सोचा है, पर डरती रही... कहीं तुम दूर न हो जाओ।

विधान ने उसका हाथ थाम लिया और बोला –
अगर डर ही था, तो आज से खत्म कर दो। क्योंकि मैं तुमसे सिर्फ दोस्ती नहीं, ज़िंदगी भर का साथ चाहता हूँ।

संजना की आँखों से खुशी के आँसू बह निकले। उसने भी पहली बार खुलकर कहा –
मैं भी तुम्हें चाहती हूँ विधान... हमेशा से।

उस पल जैसे पूरी दुनिया ठहर गई। चारों तरफ फूलों की खुशबू, हल्की हवा और उनके दिलों की धड़कन एक-दूसरे से मिलकर एक नई धुन बना रही थी।

वक्त बीतता गया। पढ़ाई खत्म हुई, करियर शुरू हुआ, और दोनों ने एक-दूसरे का हाथ कभी नहीं छोड़ा। उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उनका प्यार हर मुश्किल से मज़बूत होकर निकला।

उनकी कहानी यही साबित करती है कि सच्चा प्यार शब्दों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे पलों, भरोसे और साथ निभाने से ज़िंदा रहता है।


                                                   REKHA GUPTA 

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