मुसाफिरें-ए-दर्द

Author: Alka tiwari
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories 
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बारिश की हल्की बूंदें सड़क पर पड़ रही थीं। हर तरफ सन्नाटा था। अरनव अकेले अपने कमरे में बैठा था। दिल भारी था आँखें नम थी । उसकी दुनिया खाली और वीरान लग रही थी। कुछ महीने पहले उसने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी हार मिली थी परिवार से दूर, नौकरी में असफल, और प्यार में धोखा। उसे कोई नहीं समझता था।

वहीं दूसरी ओर खुशी अपने कमरे में खिड़की के पास खड़ी थी। आसमान को घूरते हुए, वह अपने टूटे दिल को संभाल रही थी। उसके भी हालात ठीक नही थे बचपन में परिवार का प्यार नहीं मिला, आज भी किसी पर भरोसा करना मुश्किल था उसके लिए दुनिया ने सिर्फ दर्द ही दिया था।

किस्मत ने उन्हें एक एक्ज़ीक्यूटिव वर्कशॉप में मिलवाया।
पहली मुलाकात में ही दोनों ने महसूस किया कि यह कोई साधारण मुलाकात नहीं है कुछ तो है जो इन्हे आपस मे बाधँ रही है 
दोनों की आँखों में दर्द था, और वह दर्द एक-दूसरे को खींच रहा था।

अरनव ने खुशी से पूछा आप हमेशा इतने चुपचाप क्यों रह्ती है
खुशी (थोड़ी झिझकते हुए) कहा क्योंकि दुनिया ने मुझे बहुत चोट दी है अब मुझमे और हिम्मत नही है और शायद मैं अब किसी पर भरोसा नहीं कर सकती।

अरनव ने गहरी साँस ली। कहा मैं समझ सकता हूँमैं भी बहुत कुछ सह चुका हूँ।इसीलिए तुम्हारे दर्द को महसूस कर सकता हुँ ,और इस पहली बातचीत में ही दोनों ने महसूस किया कि उनके दर्द के पीछे भी वही खालीपन है।

समय बीतने लगा। वर्कशॉप के दौरान, दोनों एक दूसरे के सहारे बन गए।
अरनव खुशी को ध्यान रखता था ।खुशी अरनव का ध्यान रखती है दोनो साथ मे मस्ती करते ।दोनो बहुत पास आ गये थे लेकिन हर नज़दीकी के बीच एक डर भी था किसी को खुलकर प्यार करने का डर।
दोनों जानते थे कि अगर रिश्ता टूट गया तो अब संभाल नही पायेंगे। 
खुशी (धीरे से) आप हमेशा मेरी मदद करते हैं लेकिन क्या मैं भी आपकी मदद कर सकती हूँ?
अरनव ने कहा तुम बस मेरी मुस्कान बनी रहो, मेरे साथ रहो यही काफी है।

हर दिन वे एक-दूसरे के दर्द को समझते, अपने टूटे हुए हिस्सों को धीरे-धीरे जोड़ते।

एक दिन ऑफिस का बड़ा प्रोजेक्ट फेल हो गया। अरनव पर परिवार और बॉस का दबाव बढ़ गया जिनकी वजह से उसे दूर जाना पङा ।

खुशी ने भी अपने जीवन में बड़ी मुश्किलों का सामना किया वह अकेली थी, और उसकी जिंदगी में एक अंधेरा छा गया।
रात के समय तेज बारिश में, दोनों शहर की भीड़ में गलती से अलग हो गए।

अरनव ने कॉल किया, लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं।
खुशी ने मैसेज किया, लेकिन फोन बंद था।
उस रात दोनों ने पहली बार महसूस किया जिंदगी बिना एक-दूसरे के अधूरी है।

कुछ हफ़्तों बाद, किस्मत ने एक और मौका दिया।
अरनव ने अपने दर्द और परेशानियों के बीच, खुशी को ढूँढ निकाला।
खुशी भी अपने आंसुओं और डर के साथ अरनव के पास आई।
जब वे आमने-सामने आए तो दोनो बहुत भावुक हो गए। 
अरनव ने कहा तुम्हें खोकर मैं जी नहीं सकता। तुम्हारा हाथ चाहिए मुझे हमेशा के लिए।
खुशी ने (रोते हुए) कहा मैंने भी तुम्हें बहुत खोजा और अब पाया है तुम ही मेरा सहारा हो

दोनों ने एक-दूसरे को कसकर पकड़ लिया।
सिर्फ हाथ नहीं, दिल, और रूह भी।

अब उनके रास्ते आसान नहीं थे। परिवार, ज़िंदगी की जिम्मेदारियाँ, डर सब था।
लेकिन दोनों ने ठान लिया कि एक-दूसरे को छोड़ेंगे नहीं।वे एक-दूसरे के दर्द में ताकत बन गए।
मुश्किल रातों में एक-दूसरे का सहारा बने।
प्यार में गहरे उतर गए, जहाँ सिर्फ दिल और रूह की बातें होती हैं।

और अंत में, वे एक पार्क में बैठे थे जहाँ बारिश की हल्की बूंदें उनके चारों ओर फैल रही थी 
अरनव ने कहा अब कोई डर नहीं है ।
खुशी ने कहा हम साथ हैं और यही काफी है।

दोनों ने आँसू पोंछे और गले लगकर अपने दर्द को खुशी में बदल लिया।

मुश्किलें आने पर भी सही इंसान साथ हो, तो जिन्दगी आसान हो जाती है।
अरनव और खुशी ने अपने टूटे हुए हिस्सों को जोड़कर एक-दूसरे में सुकून और प्यार पाया। 

                        Musafire - e - Dard 

ALKA tiwari 
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