अधूरी मोहब्बत — ( दर्दभरी कविता इन गजल स्टाइल )

Author: Alka Tiwari ( membership writer )
📍 Location: INDIA
✍️ Writes: Poetry / Stories 
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इस कविता को गीत के रूप में सुनें...

ग़ज़ल संस्करण




"कभी लफ़्ज़ों ने चाहा कि रो लें जी भरकर,
मगर हालात से आँखें मिला ना सके।

हम मुस्कुराए सबके सामने उम्र भर मगर,
तन्हाई से कभी झूठा बहाना बना न सके।

दिल रोज़ टूटता रहा तेरी यादो के तले,
और हम किसी को भी बता न सके।

तेरी एक ख़ामोशी ने सब कुछ छीन लिया,
और हम अपनी ही आवाज़ पहचाना न सके।

तेरे बिना ये साँसें बोझ सी लगने लगीं,
पर ज़िंदगी से खुद को जुदा न कर सके।

हर मोड़ पर तेरा ही साया साथ चलता रहा,
फिर भी तेरे क़दमों का निशा पा न सके।

तु किसी और की खुशियों का कारण बन गया,
और हम अपना ही घर रोशन न कर सके।

हमने निभाया रिश्ता बिना नाम का उम्र भर,
और इसे दुनिया मे कही गिनवा न सके।

हर रात जागकर तेरा इंतज़ार करते रहे,
सुबह हुई तो नींद से शिकवा न कर सके।

तेरे बाद हर ख़ुशी अधूरी सी लगने लगी,
मुस्कान ओढ़ ली पर मुस्कराना न कर सके।

हमारी मोहब्बत का ये भी अजीब सच है,
तेरे होकर भी तुझे अपना न कर सके।

हम टूटते रहे हर दिन अंदर ही अंदर,
और किसी के सामने ये दर्द दिखा न सके।

तु भूल भी गया तो तुझसे कोई गिला नहीं,
हम खुद को ही इस दर्द से बचा न सके।

तु पास न होकर भी सबसे क़रीब रहा,
और हम इस क़रीबी से किनारा न कर सके।

अधूरी मोहब्बत ने ये सिखाया उम्र भर,
जो दिल से लगा हो उसे भुला न सके।

अधूरी मोहब्बत हमारी ताउम्र यही रही,
चाहा बहुत मगर मुकम्मल न कर सके।"

                  Adhuri mohabbat 

Alka tiwari.......

मेरी ये कविता आपको बहुत पसंद आएगी—दो जिंदगियां 

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